Monday, March 8, 2010

हवस आज तक किसी की पूरी नहीं हुई !

बेटे ! जिसको आप सांसारिक कामना कहते हैं , वह जलती हुई आग है, जो आज तक किसी की पूरी नहीं हुई और न कभी किसी की पूरी हो सकती सकती है ! एक कामना ख़तम नहीं हो पाती कि दूसरी कामना हावी हो जाती है !
जब तक हम बी . ए . पास नहीं कर पाते , डिग्री नहीं प्राप्त कर पाते,तब तक एम . ए .कि ललक तैयार हो जाती है ! शादी हो करके जब तक ख़ुशी मनाने का मौका आ नहीं पाता , तब तक बच्चे की हवस खडी हो जाती है !
हजार रुपये हमने कमा लिए , तो दो हजार की हवस कायम हो जाती है ! हवस उस वक्त तक समाप्त नहीं हो सकती , जब तक सारी दुनिया की सारी दौलत एक आदमी के चरणों में न आ जाये ! चाहे सारी दुनिया की दौलत को कमाने वाले का नाम सिकंदर हो , रावण हो या हिरण्यकशिप , कोई चैन नहीं मिला ! शांति मिली ? किसी को शांति नहीं मिली ! तो फिर कल्पवृक्ष से मनोकामनाएं कैसे पूरी हो सकती है ? मनोकामना में बेटे ! दृष्टिकोण में भौतिक इच्छाएं जो है ,हमें खा डालती हैं ! कहा भी गया है - भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्ता: अर्थात भोगों को हम भोग नहीं पाए , भोगों ने हमको भोग लिया ! इच्छाओं को हम पूरा नहीं कर पाए , पर इच्छाओं ने अपनी इच्छा पूरी कर ली !
अखंड ज्योति पत्रिका फरवरी २०१० से !

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