"आपके पास देने को बहुत है .
"नहीं साहब, पैसा हमारे पास कम है",
तो पैसा कौन मांग रहा है आपसे ? और पैसा देकर के आप क्या भला करेंगे आदमी का ?
आप दूसरों को प्यार दीजिए न !
आप दूसरों को सम्मान दीजिए न !
फिर देखिये कि सम्मान की दुनिया कितनी प्यासी है !
आप लोगों को प्रोत्साहन दीजिए न !
देखिये, आपके प्रोत्साहन से छोटे-छोटे आदमी क्या से क्या बन सकते हैं !
देने के लिए कुछ कम है क्या ?
आप मेहनत दे दीजिए, आप लोगों के लिए सहानुभूति दे दीजिए .
देने के लिए कुछ भी कम नहीं है ! आपके पास देने की अगर मनोवृत्ति हो,
तो आप कुछ भी दे सकते हैं !
आप चार रोटी खाते हैं, तीन रोटी खाइए, एक रोटी बचा दीजिए गरीबों के लिए !
फिर आप देखेंगे किस तरीके से आपको शान्ति मिलती है, और किस तरीके से आप प्रसन्नता के नज़दीक चले जाते हैं .
भगवान का नाम प्यार है !
प्यार आप भीतर पैदा कीजिये न !
जिस दिन आप प्यार पैदा करेंगे, उस दिन आपके मन में से एक ही उमंग
और ऐसी हिलोर उत्पन्न करेगी कि हमको कैसे दूसरों की सहायता करनी है ! "
-युग ऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य
(अमृतवाणी-"जीवन कैसे जियें ")
"नहीं साहब, पैसा हमारे पास कम है",
तो पैसा कौन मांग रहा है आपसे ? और पैसा देकर के आप क्या भला करेंगे आदमी का ?
आप दूसरों को प्यार दीजिए न !
आप दूसरों को सम्मान दीजिए न !
फिर देखिये कि सम्मान की दुनिया कितनी प्यासी है !
आप लोगों को प्रोत्साहन दीजिए न !
देखिये, आपके प्रोत्साहन से छोटे-छोटे आदमी क्या से क्या बन सकते हैं !
देने के लिए कुछ कम है क्या ?
आप मेहनत दे दीजिए, आप लोगों के लिए सहानुभूति दे दीजिए .
देने के लिए कुछ भी कम नहीं है ! आपके पास देने की अगर मनोवृत्ति हो,
तो आप कुछ भी दे सकते हैं !
आप चार रोटी खाते हैं, तीन रोटी खाइए, एक रोटी बचा दीजिए गरीबों के लिए !
फिर आप देखेंगे किस तरीके से आपको शान्ति मिलती है, और किस तरीके से आप प्रसन्नता के नज़दीक चले जाते हैं .
भगवान का नाम प्यार है !
प्यार आप भीतर पैदा कीजिये न !
जिस दिन आप प्यार पैदा करेंगे, उस दिन आपके मन में से एक ही उमंग
और ऐसी हिलोर उत्पन्न करेगी कि हमको कैसे दूसरों की सहायता करनी है ! "
-युग ऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य
(अमृतवाणी-"जीवन कैसे जियें ")
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