" गायत्री ब्राहमण की कामधेनु है ! " तो फिर जप करने से पहले तू ब्राहमण बन जा , नहीं साहब |
हम रहेंगे हत्यारे - कसाई - डाकू ही , पर चोबीस हजार का जप करेंगे | फल देगी न ?
तब बेटे फल कैसा मिलेगा | गंदे नाले में गंगाजल दल देगा , तो क्या सारा का सारा गन्दा नाला शुद्ध हो जायेगा |
नहीं, वरन वह गंगा जी भी गन्दा नाला हो जाएगी | तू मोटी बाते समझता क्यों नहीं |
मोटी बातें समझ | यह आपतिकाल है | आपतिकालिन कार्यक्रम बनाना होगा तुम्हे | क्या है यह ?
व्यक्तिगत महत्वा कान्शाये काम कर दें | सामान्य भारतीय स्तर का जीवनयापन करें ,
इस युग संध्या में तुम्हे भगवान क सहायक बनना होगा |
--- आपतिकालिन का अध्यात्म
No comments:
Post a Comment
आपको कैसा लगा ?