न तो निंदा पर विचार करो और न प्रशंसा की चाह करो! दुसरे तुम्हारे लिए क्या कहते हैं , इसके लिए चिंतित होने की तनिक भी आवश्यकता नहीं है ! जिस कार्य को तुम्हारी अंतरात्मा ठीक समझती है , उसी पर सच्चे ह्रदय से आरुढ़ रहो ! विरोधी लोग एक दिन समर्थक बन जायेंगें !
विचारसार एवं सूक्तियां
पंडित. श्रीराम शर्मा आचार्य
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