साथियों ! हमारे भीतर दैवी और आसुरी -दो सताएँ, दो शक्तियाँ काम करती हैं ! अपने भीतर दोनों की रस्साकस्सी होती रहती है ! दोनों अपनी -अपनी और खींचने के लिए इसी तरह काम करती रहती हैं , जैसे कि दो पार्टियाँ इलेक्शन में खडी हो गई हैं ! दोनों के प्रचारतंत्र मजबूत हो गए हैं ! दोनों ने अपनी - अपनी बातें कहनी शुरू कर दी हैं ! इन दोनों का इलेक्शन अपने भीतर होता रहता है ! दोनों की लड़ाई भीतर जमी रहती है ! इनमें से एक असुर है और एक देव !
अगर हम देव के पक्षमें वोट देना शुरू करें , देव का हम समर्थन शरू करें तो बेटे ! हमारे भीतर वे क्षमताएँ जाग्रत हो सकती हैं , जो हमको स्वर्गीय जीवन जीने का आनंद दे सकती हैं ! इसी जीवन में हम देवताओं के तरीके से इसी शरीर में शानदार जीवनयापन कर सकते हैं !
पंडित. श्रीराम शर्मा आचार्य
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