Wednesday, December 29, 2010

प्रभु को किस प्रकार प्रसन्न

कामनाओं को साथ लेकर परमात्मा की पूजा प्राथना करने वाला वास्तव में परमात्मा की नहीं अपनी कामनाओं की ही उपासना किया करता है ! उसमे जो कुछ लगन,तीव्रता और तन्मयता होती है,उसके कामनाओं की लिप्सा ही हुवा करती है,प्रभु प्रेम नहीं!तब भला ऐसा वंचक उस विज्ञानमय प्रभु को किस प्रकार प्रसन्न कर सकता है ??

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