Wednesday, April 13, 2011

अकाल से जूझने वाली कन्या सुप्रिया

अकाल से जूझने वाली कन्या सुप्रिया 

प्रश्न सामर्थ्य और क्षमता का नहीं,उचस्तरिय भावनाओं का है !
 भगवान बुद्ध के समय श्रावस्ती में भयंकर अकाल पड़ा !
 साधन संपन्न लोग  न केवल घरों में छिप गए अपितु अपने पास उपलब्ध अन्न, 
वस्त्र भी छुपा बैठे ! 
ऐसे समय बुद्ध के समक्ष सुप्रिया नाम की एक कुलीन कन्या
 ने राज्य के भरण पोषण की प्रतिज्ञा की ! 
वह घर-घर जाकर अन्न -वस्त्र मांगने लगी ! 
उसकी निष्ठासे जनभावनाएं भड़क उठीं और 
देखते -देखते अकाल से लड़ने वाली शक्ति सामर्थ्य जुटकर खड़ी हो गयी !
 कभी भी परिस्थितियाँ कितनी ही औंधी -सीधी क्यों न हों ,
यदि प्रारंभ में कुछ भी निष्ठावान देवदूत खड़े हो गए तो न केवल लक्ष्य पूर्ण हुवा, 
अपितु वह इतिहास भी अमर हो गया ! 

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