अकाल से जूझने वाली कन्या सुप्रिया
प्रश्न सामर्थ्य और क्षमता का नहीं,उचस्तरिय भावनाओं का है !
भगवान बुद्ध के समय श्रावस्ती में भयंकर अकाल पड़ा !
साधन संपन्न लोग न केवल घरों में छिप गए अपितु अपने पास उपलब्ध अन्न,
वस्त्र भी छुपा बैठे !
ऐसे समय बुद्ध के समक्ष सुप्रिया नाम की एक कुलीन कन्या
ने राज्य के भरण पोषण की प्रतिज्ञा की !
वह घर-घर जाकर अन्न -वस्त्र मांगने लगी !
उसकी निष्ठासे जनभावनाएं भड़क उठीं और
देखते -देखते अकाल से लड़ने वाली शक्ति सामर्थ्य जुटकर खड़ी हो गयी !
कभी भी परिस्थितियाँ कितनी ही औंधी -सीधी क्यों न हों ,
यदि प्रारंभ में कुछ भी निष्ठावान देवदूत खड़े हो गए तो न केवल लक्ष्य पूर्ण हुवा,
अपितु वह इतिहास भी अमर हो गया !
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