Wednesday, February 17, 2010

तुम द बेस्ट बन जाओ

पर्वत की चोटी पर झूमता हुआ विशाल वृक्ष नही बन सकते
तो घाटी में खड़ा छोटा पौधा ही बन जाओ ,परन्तु बनो .
पर्वत की विशाल सतह से चिपकी छोटी सुंदर बेल ,
पौधा नही बन सकते तो बेल ही बन जाओ ,परन्तु बनो .

तना नही बन सकते हो तो शाखा ही बन जाओ
किंतु ऐसी जो उत्साह से झूमती रहे .
शाख नही बन सकते ,तो घास का तिनका ही बन जाओ
जो एक सुंदर उपवन की शोभा बढ़ाता रहे ,परन्तु बनो .

नायक नही बन सकते ,तो अनुसरण कर्ता ही बन जाओ
यहाँ सभी के लिए कुछ न कुछ जरुर है .
करने को बहुत कुछ है ,और करना बहुत थोड़ा है
हम काम के अत्यन्त निकट खड़े है ,उसे करो .

राजमार्ग नही बन सकते, तो पद चिन्ह ही बन जाओ
सूरज नही बन सकते ,तो रोशनी ही बन जाओ .
सफलता विफलता आकर का खेल नही है ,
इसलिए तुम द बेस्ट बन जाओ .

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