Wednesday, March 3, 2010

भूल स्वीकार करने के लिए भी शक्ति लगती है

जब मनुष्य कोई गलती कर बैठता है,तब उसे अपनी भूल का भय लगता है ! वह सोचता है कि दोष को स्वीकार कर लेने पर मै अपराधी समझा जाऊंगा, लोग मुझे बुरा भला कहेंगे और गलती का दंड भुगतना पड़ेगा ! वह सोचता है कि इन सब झंझटो से बचने के लिए यहाँ अच्छा है कि गलती को स्वीकार ही न करूँ , उसे छिपा लूँ या किसी दुसरे के सीर मढ़ दूँ ! इस विचारधारा से प्रेरित होकर काम करने वाले व्यक्ति भारी घाटे में रहते हैं ! एक दोष को छिपाने की आदत पड़ जाती है ! दोषों के भार से अन्तकरण दिन - दिन मैला , भदा और दूषित होता जाता है और अंतथा वह दोषों की , भूलो की खान बन जाता है ! गलती करना उसके स्वभाव में शामिल हो जाता है !

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